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चाईबासा में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाकर अज्ञात बीमारी के बारे में लोगों को किया जागरूक

चाईबासा : अज्ञात घातक बीमारी को लेकर बुधवार को चिकित्सा टीम की ओर से चाईबासा में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया गया. यह घातक बिमारी एक वायरस की तरह है जो इसकी चपेट में आने से शरीर में बूंदे जैसे दाने निकल रहे है. यह संक्रमित बिमारी ज्यादातर बच्चों में देखी जा रही है. इसकी अविलंब रोकथाम के लिए चांडिल प्रखंड के आदर्श कॉलोनी के सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश पोद्दार जी ने झारखंड राज्य के अध्यक्ष श्री रबींद्रनाथ महतो जी को ट्वीटर के माध्यम से जानकारी देकर आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया, अध्यक्ष जी ने त्वरित संज्ञान में लेकर चाईबासा डीसी सर को ईलाज हेतू हर-संभव मदद करने का निर्देश दिया.

चिकित्सा पदाधिकारी की मौजूदगी में बड़ा महुलडीहा गांव में चिकित्सा शिविर का आयोजन कर 86 जनों का जांच किया गया है तथा जांच उपरांत संदिग्ध पाए जाने वाले लोगों का आवश्यकतानुसार इलाज भी किया जा रहा है. दिउड़ीसाई टोला के ग्रामीणों वालों ने अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो व सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश पोद्दार के प्रति आभार प्रकट किया है.

डोहरे टुसू पर्व को लेकर पिलीद स्टेडियम में अहम बैठक

ईचागढ़: प्रखंड के मिलन चौक सितु के पिलिद स्टेडियम में मंगलवार को फुलचांद महतो की अध्यक्षता में बैठक हुआ. जिसमें डोहरे टुसू को लेकर विचार विमर्श किया गया. निर्णय में आगामी दिनांक 16 जनवरी 2023 को मिलन चौक से सतीघाट तक पारंपरिक तरीके से ढोल नगाड़ों और नृत्य के साथ विशाल जुलूस निकाला जाए.

उन्होंने बताया कि हमारी संस्कृति विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हमारी रीति रिवाज को बचाए रखना जरूरी है. यही हमारी संस्कृति की पहचान है. सभी साथियों से अपील करते हुए कहा कि आनेवाले 16 जनवरी को विशाल एकता का परिचय देते हुए इस ऐतिहासिक डोहरे टुसू जुलूस को सफल बनाएं .

मौके पर त्रिलोचन महतो, फुलचंद महतो, राजेश प्रसाद, अभिमुन्य महतो, मुकेश कुमार, गोपेश आदि मौजूद थे.

पश्चिमी सिंहभूम : सीआरपीएफ जवान ने पहले कैंप में की अंधाधुंध फयरिंग, फिर खुद को मार ली गोली

पश्चिमी सिंहभूम: जिले के सीआरपीएफ 60 बटालियन के जवान अमित सिंह ने पहले कैंप में अंधाधुंध फायरिंग की, फिर खुद ही अपने मुंह के नीचे इंसास राइफल से गोली मार ली।गोली चलते ही वे फर्श पर गिर गए। इससे मौके पर ही जवान की मौत हो गयी।गोली चलने की आवाज से कैंप में थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी मच गयी। घटनास्थल पर जवानों ने अमित सिंह को फर्श पर पड़ा देखा। यह घटना घोर नक्सल प्रभावित गोइलकेरा थाना अंतर्गत आराहासा सीआरपीएफ के 60 बटालियन कैंप में हुई।पुलिस ने सीआरपीएफ जवान की इंसास राइफल और उनका मोबाइल जब्त कर लिया। मामले की जांच की जा रही है। मृतक अमित जम्मू कश्मीर के बिसना के देवली थाना क्षेत्र के थे।

आत्महत्या की वजह हो सकती है मानसिक तनाव

बताया जा रहा है कि मृतक अमित सिंह चार-पांच दिनों पहले ही हवलदार की ट्रेनिंग कर लौटे थे। वे कैंप में हमेशा तनाव में रहते थे। घर में हमेशा फोन पर बात करते थे। ऐसा लगता है कि वे घरेलू परेशानी से जूझ रहे थे। 5 जनवरी को भी वे फोन से अपने घर पर बात किए।अचानक रात में फायरिंग की आवाज आई।उन्होंने खुद को गोली मार ली थी। मृतक अमित जम्मू कश्मीर के बिसना के देवली थाना क्षेत्र के थे। उनके पिता भी सेना में थे।उनके घर में पत्नी और भाई है। परिवार वालों को घटना की सूचना दे दी गयी है। शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराकर शव को उनके पैतृक गांव जम्मू कश्मीर भेज दिया गया।

रामगढ़: 10 लाख 10 हज़ार की लागत से हुआ पेवर्स ब्लॉक रोड का उदघाटन

रामगढ़ (सौरभ नारायण सिंह): जिले के नगर परिषद क्षेत्र के मुर्राम कला के नायक टोला में लगभग 10 लाख 10 हज़ार की लागत से पेवर्स ब्लॉक रोड का उदघाटन किया गया।

नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नं 30 मुर्राम कला के नायक टोला में लगभग 4 लाख 50 की लागत से विनोद बक्शी के घर से प्रकाश मोदी के घर तक पेवर्स ब्लॉक रोड एवं 5 लाख 60 हज़ार की लागत से गणेश नायक के घर से देव नायक के घर तक पेवर्स ब्लॉक रोड का उदघाटन संयुक्त रूप से नगर परिषद अध्यक्ष युगेश बेदिया, उपाध्यक्ष मनोज़ कुमार महतो एंव वार्ड पार्षद सीता देवी के द्वारा नारियल फोड़ कर एंव फीता काटकर किया गया।
मौके पर मनोज़ कुमार महतो ने बताया कि नायक टोला में कच्ची सड़क रहने के कारण लोगों को बरसात के दिनों में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। लोगों की समस्याओं के देखते हुए तुरंत उनकी जटिल समस्या का समाधान किये। सड़क बनने से लोगों के चेहरों में खुशी की झलक दिखी।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान पार्षद प्रतिनिधि मनोज़ महतो, सुमित नायक, सागर नायक, निक्की नायक, सुरेश नायक, बॉबी नायक, प्रकाश करमाली, विशेश्वर करमाली, आजाद करमाली, तरुण नायक, विकास नायक, अजय नायक, विकास ठाकुर, जयप्रकाश नायक, अजय साहू, निशा देवी, पूनम देवी, मंजू देवी, रीना देवी, पनिता देवी, राजू राम नायक,लूटन नायक तथा अन्य लोग उपस्थित थे।

3 जनवरी जयपाल सिंह मुंडा जयंती के मौके पर, झारखंड आंदोलनकारी स्मारक का होगा शिलान्यास

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने सोमवार को बताया कि जयपाल सिंह मुंडा की जयंती पर 3 जनवरी को झारखंड आंदोलनकारी स्मारक का शिलान्यास किया जायेगा। स्मारक के निर्माण का शिलान्यास रांची के चिरौंदी में किया जाएगा। इस स्मारक में सभी झारखंड आंदोलनकारियों के नाम अंकित किए जाएंगे।

जयपाल सिंह मुंडा की जयंती को झारखंड आंदोलनकारी दिवस के रूप में मनाया जाएगा

3 जनवरी को झारखंड आंदोलनकारी अल्बर्ट एक्का चौक से लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर तक जुलूस की शक्ल में पहुंचेगे। साथ ही हर साल 3 जनवरी को जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के साथ साथ झारखंड आंदोलनकारी दिवस भी मनाया जायेगा। इस मौके पर पूरे राज्य भर में आन्दोलनकारियों ने कार्यक्रम रखे है। गुमला जिला के बिशुनपुर में झारखंड आंदोलनकारी दिवस पर 200 नगाड़ों की गूंज व पुष्प-वर्षा के साथ झारखण्ड आन्दोलनकारियों को सम्मानित किया जाएगा।

पारसनाथ को पर्यटन स्थल का दर्जा देने का पूरे देश में विरोध, जाने क्या है पूरा मामला

झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ी को पर्यटन स्थल घोषित करने के सरकार के कदम का देशभर में जैन समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में दर्जन भर शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जैन मुनियों ने सरकार से अपने फैसले को वापस लेने की मांग की है. पारसनाथ हिल, जिसे सम्मेद शिखर के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया भर में जैनियों के बीच सबसे बड़ा तीर्थस्थल है।

पूजा स्थल की पवित्रता हो जाएगी भंग

जैनियों के 24 में से 20 तीथर्ंकरों की ‘निर्वाण’ (मोक्ष) भूमि होने के कारण यह उनके लिए पूजनीय क्षेत्र है। जैन समाज का कहना है कि अगर इसे पर्यटन स्थल घोषित किया गया तो इस पूजा स्थल की पवित्रता भंग हो जाएगी। वहां मांसाहार और शराब सेवन जैसी अनैतिक गतिविधियां बढ़ेंगी और इससे ‘अहिंसक’ जैन समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।

जैन समाज गुस्से में है. श्वेतांबर हों या दिगंबर, सभी जैन लोग इस बात से नाराज हैं कि झारखंड सरकार ने उनके सबसे पवित्र तीर्थ स्थल को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया है. झारखंड सरकार ने फैसले में ये भी कहा है कि सम्मेद शिखरजी स्थल पवित्र तीर्थ स्थान है. दरअसल, केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें सम्मेद शिखरजी को इको-टूरिज्म प्लेस के तौर पर चिन्हित किया गया था. इसके बाद झारखंड सरकार के मुख्य सचिव ने भी नोटिफिकेशन जारी करके इस पर मुहर लगा दी. लेकिन अब पूरा जैन समाज इस बात का विरोध कर रहा है कि सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल क्यों घोषित किया गया. जैन समाज की मांग है कि सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल की जगह तीर्थ स्थल घोषित किया जाए.

देश के कोने-कोने में विरोध प्रदर्शन

जैन समाज के लोगों ने देश के हर राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है. दिल्ली के इंडिया गेट पर हजारों की भीड़ ने जोरदार प्रदर्शन किया, तो मुंबई से लेकर अहमदाबाद हो या भोपाल. हर तरफ जैन समाज के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया है. अहमदाबाद की सड़क पर जैन समाज के एक लाख लोगों ने अपना शक्ति-प्रदर्शन किया. एक लाख लोगों ने दस किलोमीटर तक मार्च निकाला. हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था कि जैन समाज कम है कमजोर नहीं है. वहीं, दिल्ली में हजारों की भीड़ इंडिया गेट पर पहुंची. उनके हाथों में झंडे और पोस्टर बैनर थे. महारैली को रोकने के लिए पुलिस को बैरिकेड लगाने पड़े. तो मुंबई में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली. इसके अलावा जैन समाज के लोगों ने आदिनाथ की चरण पादुकाओं को खंडित करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की है. बता दें कि शत्रुंजय पर्वत गुजरात के पालीताणा में है. शत्रुंजय पर्वत को जैन धर्म में सम्मेद शिखरजी के बाद दूसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है. जैन समुदाय के लोगों ने देश के कई हिस्सों में निकाली रैलियां के लोगों ने देश के कई हिस्सों में रैलियां निकालकर उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है, जिसमें सरकार ने सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल घोषित किया है.

झारखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी है पारसनाथ

गौरतलब है कि पारसनाथ झारखंड की सबसे ऊंची पहाड़ी है, जो वन क्षेत्र से घिरी हुई है. पहाड़ी की तलहटी में दर्जनों जैन मंदिर हैं. 2 अगस्त, 2019 को झारखंड सरकार द्वारा की गई सिफारिश के बाद केंद्रीय वन मंत्रालय ने पारसनाथ के एक हिस्से को वन्यजीव अभयारण्य और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया है. जैन समाज का कहना है कि क्षेत्र में ईको-टूरिज्म और अन्य गैर-धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देना गलत है.

रामगढ़: आदिवासी छात्र संघ बरकाकाना ओपी प्रभारी का आदिवासियों को गाली देते हुए ऑडियो को लेकर विधायक चमरा लिंडा से मिला

झारखंड स्थापना दिवस पर जिले के बरकाकाना ओपी प्रभारी विनय कुमार का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे आदिवासी ग्रामीणों को गाली देते हुए सुनाई दे रहे थे।

रांची/रामगढ़ (सौरभ नारायण सिंह) : झारखंड स्थापना दिवस पर रामगढ़ जिले के बरकाकाना ओपी प्रभारी विनय कुमार का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे आदिवासी ग्रामीणों को गाली देते हुए सुनाई दे रहे थे। उनका ऑडियो वायरल होते ही पूरे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था। इस मामले को लेकर आदिवासी छात्र संघ के सदस्य विधायक चमरा लिंडा से मिलने रांची उनके आवास पहुंचे। और उन्हे इस पूरे घटना की जानकारी देते हुए audio भी सुनाया। जिसके बाद विधायक चमरा लिंडा ने आदिवासी छात्र संघ के सदस्यों को कहा कि इस मामले को लेकर वह CM हेमंत सोरेन से मिलेंगे और बड़काकाना ओपी प्रभारी विनय कुमार पर त्वरत कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर जेल भेजने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्यवाही नही होती है तो रामगढ़ जिले के आदिवासी ग्रामीण गोलबंद होकर विरोध मार्च निकालेंगे।

आदिवासी छात्र संघ द्वारा की गई शिकायत की कॉपी

क्या था मामला

बरकाकाना ओपी प्रभारी विनय कुमार ने अपने थाना क्षेत्र के पोचरा गांव के लोगों को लगातार भद्दी भद्दी गालियां दे रहे थे। वे पोचरा गांव के ही एक प्रबुद्ध नागरिक छोटेलाल करमाली से फोन पर बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यहां तक कह डाला कि अगर किसी की औकात है, तो वे राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट तक जाकर शिकायत करें। उनका कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी गांव वालों की यह औकात नहीं कि उनके खिलाफ शिकायत तक कर सके।

बरकाकाना ओपी प्रभारी विनय कुमार

रामगढ़ एसपी से की गई थी शिकायत

पूरे मामले पर छोटे लाल करमाली और गांव के अन्य लोगों ने रामगढ़ एसपी पीयूष पांडे से शिकायत की थी। एसपी को दिए गए लिखित आवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि इस तरह के थाना प्रभारी को क्षेत्र में रहने की गुंजाइश ही नहीं बनती है। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता के सहयोग और उनकी सुरक्षा के लिए है, ना कि वे अपना तानाशाही रवैया अपनाएं और लोगों को परेशानी में डालें, जिस तरह की बात और भाषा का प्रयोग उन्होंने किया है वह किसी भी स्तर पर शोभनीय नहीं है। छोटेलाल करमाली ने कहा कि आज झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार लगातार मूल वासियों को न्याय दिलाने के लिए काम कर रही है। ऐसे न्याय प्रिय सरकार में ऐसे अभद्र भाषा वाले थाना प्रभारी क्षेत्र में रहने का हक नहीं।

SP को की गई शिकायत की कॉपी

एसपी ने ओपी प्रभारी के खिलाफ बिठाई थी जांच

इस पूरे प्रकरण पर एसपी ने ग्रामीणों को इस बात का आश्वासन दिया है कि वे तत्काल इस पर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने एक जांच कमेटी का भी गठन किया था, जो बरकाकाना ओपी प्रभारी विनय कुमार के खिलाफ जांच कर रही है।

किस बात को लेकर तैश में थे ओपी प्रभारी

बरकाकाना ओपी प्रभारी किस बात के लिए तैश में थे इसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। 13 नवंबर की शाम तेलियातु गांव निवासी प्रमोद कुमार महतो अपनी पत्नी और बच्चे के साथ हॉस्पिटल से घर लौट रहे थे। प्रमोद कुमार महतो फौज में भी हैं और वर्तमान में गंगटोंक में पदस्थापित हैं। छुट्टी में वह घर आए थे तो अपने बीमार बच्चे को दिखाने के लिए रामगढ़ के एक निजी अस्पताल में आए थे। लौटते वक्त पोचरा गांव के पास उनकी बाइक के आगे अचानक से एक टाटा सूमो ओवरटेक कर रुकी। इस दौरान जब उन्होंने ब्रेक लगाने की कोशिश की तो उनकी पत्नी भी बाइक से नीचे गिरते-गिरते बची। अचानक हुए इस घटना के बाद प्रमोद कुमार महतो ने टाटा सुमो पर सवार लोगों को यह कहा कि वे लोग गलत तरीके से गाड़ी चला रहे हैं और अगर संयोग खराब होता तो भीषण दुर्घटना भी हो जाती। उनकी बात पर गाड़ी के अंदर मौजूद शख्स ने खुद को बड़ा बाबू बताते हुए कहा कि एक्सीडेंट हुआ नहीं है तो पहले ही इतना क्यों बोल रहा है। इसके बाद वे आवेश में आ गए और उन्होंने भद्दी गालियां दी। प्रमोद कुमार महतो ने उनसे परिचय पत्र मांगा तो उन्होंने कहा कि वे बरकाकाना ओपी प्रभारी हैं। लेकिन क्योंकि वह सिविल ड्रेस में थे तो प्रमोद महतो और उस व्यक्ति के बीच बहस हो गई। इसी दौरान उस व्यक्ति ने प्रमोद महतो को थाना ले जाने की भी बात कही। बाद में ग्रामीणों के द्वारा वहां बीच बचाव किया गया और कहा गया कि जिस तरीके से टाटा सुमो चल रही थी उससे दुर्घटना हो सकती थी। ग्रामीणों का यह विरोध भी उन्हें नागवार गुजरा। इस पूरे मामले को लेकर छोटेलाल करमाली के साथ बरकाकाना प्रभारी विनय कुमार की वार्ता हो रही थी और वह शराब के नशे में धुत होकर लगातार गाली दिए जा रहे थे।

CM तत्काल बरकाकाना ओपी प्रभारी पर करे कार्यवाही, नहीं तो गोलबंद होकर निकालेंगे विरोध मार्च : चमरा लिंडा

कोडरमा: मुखिया व फाउंडेशन के सहयोग से रोगियों ने कराया मुफ्त इलाज


कोडरमा ( श्रीकांत शर्मा): झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर चंदवारा पश्चिमी सभागार में चंदवारा पश्चिमी के मुखिया संतोष कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में व जीवन सवेरा फाउंडेशन के सौजन्य से मुक्त जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस आयोजन की शुरुआत चंदवारा पश्चिमी के मुखिया व जीवन सवेरा फाउंडेशन के संस्थापक राजू भाटिया तथा उप मुखिया बसंती देवी ने संयुक्त रूप से फीता काटक किया। स्वस्थ जांच शिविर में हजारीबाग व कोडरमा से आए अनुभवी डॉक्टरों डॉ राकेश, रोशन ,डॉ आरके सिंह, डॉ अनुपमा, डॉ अजय कुमार , डॉ विशाल कुमार, व अन्य सहयोगियों के साथ आए।

रोगियों का मुफ्त में किया गया जांच, मुफ्त बाटी गई सैनिटरी पैड

उपस्थित स्वस्थ कर्मियों ने जांच करवाने आए रोगियों के ब्लड शुगर बीपी तथा अन्य शारीरिक जांच मुफ्त में किया। इसके अलावा महिलाओं और लड़कियों को जागरूक करने हेतु लेडीस डॉक्टर के द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाया गया जहां सैनिटरी पैड का वितरण किया गया।

इस मौके पर जीवन सवेरा फाउंडेशन के डायरेक्टर उदय चंद्र किशोर व सरवर आजाद खान ,शंकर पांडे ,कुंदन कुमार, संदीप कुमार बंटी, कुमार शंभू, पासवान महेश पंडित, नंदू शर्मा, विनोद साहू, प्रदीप पंडित, पप्पू मोदी, मुकेश राही उपस्थित रहे। मौके पर सैकड़ों की संख्या में रोगियों ने मुफ्त इलाज कराए।

22 साल का हुआ झारखंड, राज्य को मिले 6 CM, 3 बार लगा राष्ट्रपति शासन

15 नवंबर 2022 को झारखंड के गठन के 22 साल हो जायेंगे. इसी दिन देश के 28वां राज्य के रूप में उदय हुआ। इस राज्य के जन्मदाता तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी हैं।

झारखंड राज्य की कोख में वन तथा खनिज संपदाओं का भंडारण है। विधाता ने जनजातीय क्षेत्र के सवा तीन करोड़ झारखंड वासियों के सर्वांगीण विकास एवं उत्थान के लिए जमीन के अंदर बॉक्साइट, अभ्रक, लोहा और कोयला जैसे प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा दिया है। दूसरी ओर, जमीन के ऊपरी सतह पर मेहनतकश मजदूर अपने खेतों में पसीना बहाकर सोना निकालने का कार्य कर रहे हैं.

22 साल में 6 राजनेता बने राज्य के मुख्यमंत्री

एकीकृत बिहार से अलग होने के बाद यहां बाबूलाल मरांडी को झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 15 नवंबर, 2000 को झारखंड के गठन के बाद से छह राजनेताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। बाबूलाल मरांडी भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व 28 माह तक किए। बाबूलाल मरांडी का कार्यकाल 15 नवंबर, 2000 से 17 मार्च, 2003 तक रहा। इसके बाद भाजपा के ही अर्जुन मुंडा सबसे लंबे समय तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने तीन कार्यकालों में पांच साल से अधिक समय तक सेवा की, लेकिन कभी भी कार्यकाल पूरा नहीं किया। अर्जुन मुंडा का पहला कार्यकाल 18 मार्च, 2003 से एक मार्च, 2005 तक रहा। इसके बाद 12 मार्च, 2005 से 17 सितंबर, 2006 और फिर 11 सितंबर, 2010 से 17 जनवरी, 2013 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे।

सबसे कम नौ दिनों का कार्यकाल रहा शिबू सोरेन का

राज्य के दो मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और उनके बेटे हेमंत सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रतिनिधित्व किया। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन का पहला कार्यकाल केवल नौ दिनों में खत्म हो गया, क्योंकि वह यह साबित नहीं कर सके कि उन्हें सदन के बहुमत का समर्थन प्राप्त है और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इनका कार्यकाल दो मार्च, 2005 से 11 मार्च, 2005 तक रहा। इसके बाद 28 अगस्त, 2008 से 18 जनवरी, 2009 तक रहा। फिर इसके बाद 30 दिसंबर, 2009 से 31 मई, 2010 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा भी बने राज्य के मुख्यमंत्री

राज्य के निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा को भी मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मधु कोड़ा का कार्यकाल 18 सितंबर, 2006 से 27 अगस्त, 2008 तक 709 दिन राज्य के मुख्यमंत्री रहे।

3 बार लग चुका है राष्ट्रपति शासन

राज्य में पहला राष्ट्रपति शासन 19 जनवरी, 2009 से 29 दिसंबर, 2009 तक रहा। इसके बाद दूसरी बार राष्ट्रपति शासन एक जून, 2010 से 10 सितंबर, 2010 तक रहा और तीसरी बार 19 जनवरी, 2013 से 12 जुलाई, 2013 तक राष्ट्रपति शासन रहा।

रघुवर दास ने अब तक पूरा किया कार्यकाल

भाजपा के रघुवर दास ने राज्य में पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने। इनका कार्यकाल 28 दिसंबर, 2014 से 28 दिसंबर, 2019 तक सबसे अधिक 1825 दिन राज्य के मुख्यमंत्री रहे।

दूसरी बार बागडोर संभाल रहे हैं हेमंत सोरेन

वर्तमान में हेमंत सोरेन राज्य की दूसरी बार बागडोर संभाले हैं. पहली बार 13 जुलाई, 2013 से 27 दिसंबर, 2014 को 532 दिन राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद 29 दिसंबर, 2019 से अब तक राज्य के मुख्यमंत्री हैं.

आधारभूत संरचनाओं का हुआ विकास

अलग झारखंड राज्य गठन के बाद सूबे में बुनियादी सुविधा जैसी आधारभूत संरचनाओं का विकास निश्चित तौर पर हुआ है. लोहरदगा जिले के पेशरार जैसे दुरुह नक्सल प्रभावित जंगली एवं पहाड़ी इलाकों में भी बदलाव दिखा. कभी आवागमन की सुगम व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग पेशरार जैसे इलाकों में जाने से कतराते थे, वहीं आज लंबी-चौड़ी कालीकरण सड़कों पर छोटी-बड़ी वाहन दौड़ लगा रही है. अतिनक्सल प्रभावित प्रभावित पेशरार जैसे कई अन्य ग्रामीण सड़कों का न सिर्फ निर्माण कराया गया है, बल्कि वहां बिजली-पानी के साथ-साथ मुकम्मल नेटवर्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है. जिसका लाभ ग्रामीणों को भरपूर मिल रहा है. अब किसान अपने उत्पादित फसलों तथा हरी सब्जियों को बड़ी आसानी के साथ शहर के हाट बाजारों तक चंद घंटों में ही पहुंचा पा रहे हैं.

श्रोत :- @प्रभात खबर

धनबाद – पटना गंगा दामोदर एक्सप्रेस ट्रेन में बड़ा बदलाव, नए एलएचबी कोच के साथ सफर शुरू

धनबाद जंक्शन से पटना जंक्शन के बीच चलने वाली गंगा दामोदर एक्सप्रेस ट्रेन में बदलाव किया गया है। गंगा दामोदर एक्सप्रेस अब एलएचबी रैक के साथ सफर करने लगी है।

इस कारण अब एक बोगी कम कर दी गई है। यानी एस 9 बोगी अब इस ट्रेन में नहीं होगी। पहले पारंपरिक बोगियों में सीटें कम हुआ करती थीं, अब नई बोगियों में सीटों की संख्या बढ़ गई है। जिन यात्रियों ने पहले से आरक्षण करा रखा है उनकी सीट संख्या और बाेगी संख्या दोनों बदल गई है। इस कारण रेलवे अपने यात्रियों को इसकी सूचना एसएमएस के माध्यम से दे रहा है।

सुरक्षित और बेहतर माने जाते है नए कोच

नए एलएचबी कोच बेहतर और सुरक्षित कोच माना जाता है। इसमें सीटों की संख्या ज्यादा होती है। नई बोगी होने के कारण यात्रियों की सीटों में अदला-बदली कर दी गई है। स्लीपर एस-9 के यात्रियों को अलग-अलग कोच में एडजस्ट किया गया है। जिन यात्रियों ने पहले से टिकट बुक करा ली है। उन्हें नई सीटें उपलब्ध करायी जा रही हैं।

पहले से अधिक यात्री कर सकेंगे सफर

गंगा दामोदर एक्सप्रेस के एलएचबी कोच से लैस होते ही यात्रियों की संख्या भी बढ़ गई है। इसकी मुख्य वजह कोच की संख्या में बढ़ोत्तरी होना बताया जा रहा है। साथ ही आरक्षित टिकट की बिक्री में इजाफा होने की सूचना है।
गंगा दामोदर एक्सप्रेस ट्रेन में पहले स्लीपर के 9 कोच जुड़ते थे। एलएचबी रैक के बाद ट्रेन में स्लीपर का एक कोच कम हो गया है। एस-9 कोच अब नहीं जुड़ेगा। ऐसे में रेलवे ने इस कोच के यात्रियों को एडजस्ट करने की तैयारी की है। मौजूदा पारंपरिक कोच के स्लीपर डिब्बे में 72 सीटें होती थीं। एलएचबी कोच के प्रत्येक डिब्बे में 80 सीटें होंगी। आठ डिब्बों की अतिरिक्त आठ-आठ सीटों में 64 यात्रियों को आसानी से एडजस्ट किया जा रहा है।